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मानसिक रोग—एक अनदेखा संकट जो तोड़ रहा है परिवारों को
प्रोफेसर डॉ. ए.के. द्विवेदी ( वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक, चिंतक, विचारक, लेखक, सदस्य: सीसीआरएच, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार, कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर)
हमारे समाज में मानसिक रोगों को लेकर जागरूकता की बहुत कमी है, और इसी कारण आज यह एक अदृश्य महामारी बन चुकी है। हाल ही में मुझे एक महिला का फोन आया, जिसने बड़े दर्द और चिंता के साथ अपनी कहानी साझा की। उसका बेटा, जिसकी हाल ही में शादी हुई थी, कुछ समय तक सब सामान्य रहा। फिर धीरे-धीरे वह अवसाद में चला गया, और मानसिक अस्थिरता के लक्षण दिखने लगे। दुर्भाग्य से उसकी पत्नी उसे छोड़ कर चली गई। इस झटके से उसकी मानसिक स्थिति और अधिक बिगड़ गई। अब वह घर से बाहर नहीं निकलता, डॉक्टर के पास भी नहीं जाना चाहता।
यह एक अकेला मामला नहीं है। बड़े शहरों में चिंता, घबराहट, तनाव, अनिद्रा और अवसाद के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। लोग अपने ऑफिस के टारगेट पूरे करने में इतना उलझ गए हैं कि पारिवारिक जीवन, रिश्तों और मानसिक संतुलन को भूलते जा रहे हैं।
मानसिक बीमारियां अब किसी एक तबके तक सीमित नहीं रहीं। ये आम होती जा रही हैं, और यदि समय रहते इनका निदान न किया जाए, तो केवल व्यक्ति ही नहीं, उसका पूरा परिवार टूट सकता है।
समाधान क्या है?
लक्षणों को नजरअंदाज न करें: यदि आप या आपके परिवार के किसी सदस्य में व्यवहार में बदलाव, चिड़चिड़ापन, अकेले रहना, निराशा, अनिद्रा या अत्यधिक चिंता जैसे लक्षण दिखाई दें—तो यह गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
समय पर चिकित्सा लें: होम्योपैथी समेत कई चिकित्सा पद्धतियों में मानसिक रोगों का सफल और सुरक्षित इलाज संभव है। किसी योग्य होम्योपैथिक या मानसिक चिकित्सक से तुरंत सलाह लें।
परिवार को साथ दें: मानसिक रोग किसी की गलती नहीं होती। यह भी एक बीमारी है—डायबिटीज या बीपी की तरह। मरीज को दोष न दें, उसे सहारा दें।
चिकित्सकों की भूमिका: मानसिक रोगों को लेकर आम जनता में जागरूकता फैलाना चिकित्सकों की भी जिम्मेदारी है। उन्हें यह बताना जरूरी है कि चिंता, अवसाद, तनाव आदि का इलाज संभव है, बशर्ते सही समय पर कदम उठाए जाएं।
अंत में – एक अनुरोध
मानसिक रोग से जूझ रहा व्यक्ति बाहर से सामान्य दिख सकता है, लेकिन भीतर वह टूट रहा होता है। हम सभी को समझने, सहारा देने और समय पर मदद करने की जरूरत है। देर की तो हो सकता है कि न केवल रिश्ते, बल्कि जीवन भी टूट जाए।


